गोवा मुक्ति संघर्ष की 75वीं सालगिरह पर अग्रदूत राम मनोहर लोहिया को सादर नमन.श्यामनंदन यादव की कलम से…✍️

newsaaptak.live desk:-आज १८ जून को ही ७५ साल पहले गोवा पर पुर्तगाल के ४५० साल से चले आ रहे राज के ख़िलाफ़ मुक्ति की निर्णायक लड़ाई डा. राममनोहर लोहिया ने शुरू की थी. इस मुक्ति संघर्ष को गांधी जी ने आशीर्वाद दिया. गोवा के स्त्री-पुरुषों ने अपने को इससे जोड़ने का साहस पाया. चौतरफ़ा समर्थन दिया. इसमें सभी दलों ने मिलकर १९५४-५६ में दुबारा आहुति दी. तिरंगा लिए हुए ‘जयहिंद’ का नारा लगाते हुए गोवा की मुक्ति के लिए सत्याग्रह किया गया.

देशभर से लोग गोवा सत्याग्रह में शामिल हुए. तानाशाह सालाजार की पुर्तगाल सरकार ने पूरी बर्बरता दिखाई. लाठी-गोली की बरसात की. अनेकों ने प्राण दे दिए. हज़ारों घायल हुए. सैकड़ों को लंबी क़ैद की सजा सुनाई गई. गोवा पुर्तगाल की समुद्री सत्ता का १५१० में पहला एशियाई शिकार बनाया गया था. १८ जून १९४६ को डा. लोहिया के मार्गदर्शन से शुरू यह संघर्ष भारत की यूरोपीय साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद के ख़िलाफ़ १८५७ से शुरू प्रतिरोध का अंतिम अध्याय बना.

१९ दिसंबर १९६१ को भारत की सेना ने ४८ घंटे की कार्रवाई से गोवा को स्वतंत्रता दिलायी. गोवा अपनी भारतीय पहचान को सदियों बाद फिर से हासिल करके नवनिर्माण में जुटने में सक्षम हुआ. इसलिए १८ जून गोवा की अस्मिता की नवरचना की क्रांतिकारी शुरुआत की तारीख़ है.

हर साल गोवा में इसदिन मुक्ति संघर्ष के योद्धाओं का पुण्य-स्मरण किया जाता है. मडगाँव में स्थापित लोहिया प्रतिमा पर माल्यार्पण होता है. लोहिया पार्क में उत्सव का माहौल रहता है. इसबार ७५वीं सालगिरह है इसलिए गोवा मुक्ति संघर्ष की यादों का विशेष महत्व है. गोवा की आज़ादी के अग्रदूत डा. राममनोहर लोहिया को सादर नमन. गोवा सत्याग्रह में शामिल स्वतंत्रता सेनानियों का अभिनंदन. गोवा और भारत की उपनिवेशवाद के ख़िलाफ़ शानदार विजय को सलाम. जयहिंद. जय जगत.

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