नीतीश कैबिनेट का बड़ा फैसला, पंचायती राज अधिनियम 2006 में संशोधन कर वर्तमान जनप्रतिनिधियों को देगी शक्ति.

PATNA/Desk:– मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज बिहार कैबिनेट की बैठक बुलाकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी विभागीय मंत्री एवं सचिव के साथ बैठक कर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. इस बैठक का बिहार में समय पर पंचायत चुनाव नहीं होने की संभावना पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था बहाल करने का इंतजार बिहार के तमाम जनप्रतिनिधि बेसब्री से कर रहे थे. बिहार के मुखिया संघ, प्रमुख संघ, जिला पार्षद एवं सरपंच संघ के द्वारा बिहार में पंचायत चुनाव नहीं होने के कारण झारखंड की तर्ज पर सेवा विस्तार की मांग किया जा रहा था जिसका आज इंतजार खत्म हो गया है. बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा 14, 39, 66 एवं 92 में संशोधन करते हुए पुराने जनप्रतिनिधियों से ही 15 जून के बाद भी परामर्शी समिति बनाकर विकास का कार्य किया जाएगा.

सरकार के अपर मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा द्वारा बिहार पंचायती राज अधिनियम में चुनाव नहीं होने की स्थिति में संशोधन का प्रस्ताव बनाकर मंत्री परिषद की बैठक में भेजा गया था, उक्त प्रस्ताव पर पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी का अनुमोदन प्राप्त था जिसे आज मंत्री परिषद की बैठक में पास कर दिया गया है. अब इस प्रस्ताव को राज्यपाल के पास स्वीकृति हेतु भेजा जाएगा. उक्त प्रस्ताव पर राज्यपाल का हस्ताक्षर होते ही 15 जून के बाद बिहार में परामर्शी समिति का गठन करते हुए पंचायतों में विकास की गति को रफ्तार दिया जाएगा.

अभी परामर्शी समिति का प्रारूप नहीं बना है लेकिन कयास लगाया जा रहा है कि झारखंड के तर्ज पर ही मुखिया, प्रमुख एवं जिला परिषद के अध्यक्ष को ही संबंधित संस्थाओं के अध्यक्ष मानते हुए एवं उनके सदस्यों को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा.इस ओर विभागीय मंत्री सम्राट चौधरी ने इशारा करते हुए कहा है कि बिहार में लोकतंत्र कायम है और लोकतंत्र कायम रहेगा इसी को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है.

सरकार के इस फैसले से बिहार के तमाम जनप्रतिनिधियों में खुशी की लहर व्याप्त है एवं एक दूसरे को सूचना देते हुए बधाई दे रहे हैं.ज्ञात हो कि बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 में 5 वर्ष की अवधि समाप्त हो जाने के बाद चुनाव नहीं होने की स्थिति में बायलॉज में किसी तरह का कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था का प्रावधान नहीं था जिसके कारण तमाम जनप्रतिनिधियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।

सरकार में शामिल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, विकासशील इंसान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मत्स्य एवं पशुपालन मंत्री मुकेश साहनी के साथ-साथ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव मुख्य रूप से बिहार में जनप्रतिनिधियों की सेवा विस्तार की मांग कर रहे थे।

 6,040 total views,  2 views today

Share and Enjoy !

Shares
Shares