सेनारी नरसंहार कांड के फैसला पर जदयू के स्वागत का पूर्व मंत्री ने किया प्रतिकार,कहा सरकार के लिए दलित पिछड़ा अल्पसंख्यक है बलि का बकरा:श्याम रजक

Patna :-राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मंत्री श्याम रजक ने दैनिक समाचार पत्र में जदयू के द्वारा सेनारी कांड पर राज्य सरकार के निर्णय के स्वागत का वक्तव्य पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि जदयू के इस बयान से राजनीति के चश्मे से जातिवाद दृष्टिकोण परदर्शित होता है। पूर्व मंत्री ने सरकार के इस नजरिए पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया है और कहा है कि बिहार में सभी जाति धर्म को एक नजरिए से देखना चाहिए ना की पक्षपात के नजरिए से देखना चाहिए। हत्या नरसंहार जैसे जघन्य अपराध का कोई भी व्यक्ति समर्थन नहीं करता है बल्कि जाति आधारित वोट बैंक के रूप में जो देखते हैं वही ऐसा कर सकता है।लक्ष्मणपुर बाथे, मियांपुर, शंकर बीघा, बथानी टोला, बेलछी, तीस खोड़ा सहित नरसंहार के दोषियों को बरी किए जाने के विरोध में सरकार को सुप्रीम कोर्ट नहीं जाना सुशासन की मंशा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है।

साथ ही साथ पीड़ितों को न्याय के लिए गठित जस्टिस आमीर दास आयोग को भंग करना भी जातीय विद्वेष झलकता है।श्याम रजक ने कहा है कि जदयू के इस वक्तव्य से स्पष्ट हो गया कि दलित पिछड़ों महादलित अल्पसंख्यक सिर्फ बलि का बकरा है और यह सभी वर्ग मनुवादियों की नजर में अन्याय सहने के लिए ही बना है।श्री रजक ने आग्रह किया है कि इस नजरिए को शायद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित तमाम दलित पिछडे जनप्रतिनिधि संज्ञान लेंगे तथा सभी जनप्रतिनिधि व जागरूक बहुजन इसका प्रतिकार करेंगे।

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